उरला स्कूल के प्रिंसिपल अनुराग ओझा के खिलाफ उरला ग्रामीण

उरला शासकीय स्कूल से जुड़े 2024 के FIR और 2026 में नाबालिग छात्राओं से कार्य कराने की शिकायतों पर पुलिस जांच की मांग
रायपुर।
उरला क्षेत्र के शासकीय स्कूल में नाबालिग छात्राओं से संबंधित वर्ष 2024 की घटना तथा वर्ष 2026 में परीक्षा के दौरान नाबालिग छात्राओं से कार्य/ड्यूटी कराए जाने की शिकायतों को लेकर पुलिस स्तर पर स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
वर्ष 2024 की घटना एवं FIR से संबंधित शिकायत
प्रस्तुत शिकायत में वर्ष 2024 के FIR क्रमांक 0131/2024 तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 8 सहित संबंधित अभिलेखों का उल्लेख करते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की गई है। शिकायत के अनुसार, वर्ष 2024 की घटना में सुरेश खापर्डे के विद्यालय परिसर में आने-जाने और शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़े होने के संबंध में भी जांच की आवश्यकता है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि छात्राओं द्वारा संबंधित शिक्षिका मीना खापर्डे से शिकायत किए जाने के बाद मामले को गंभीरता से लेने के बजाय बच्चों को डांटकर वहां से भगा देने का आरोप है।
तत्कालीन प्रधान पाठक अनुराग ओझा की भूमिका की जांच की मांग
शिकायत में वर्ष 2024 की घटना के समय तत्कालीन प्रधान पाठक अनुराग ओझा की भूमिका की भी स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। शिक्षा विभागीय अभिलेखों एवं जांच से संबंधित तथ्यों को पुलिस जांच में शामिल करने की मांग करते हुए कहा गया है कि यदि विभागीय स्तर पर किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका अथवा लापरवाही से संबंधित तथ्य सामने आए हैं, तो उनकी स्वतंत्र रूप से जांच होना आवश्यक है।
शिकायतकर्ता ने यह भी उल्लेख किया है कि अनुराग ओझा वर्तमान में उसी विद्यालय में प्राचार्य के पद पर कार्यरत बताए जाते हैं।
वर्ष 2026 में फिर नाबालिग छात्राओं से कार्य कराने की शिकायत
वर्ष 2026 की वार्षिक परीक्षा के दौरान विद्यालय में नाबालिग छात्राओं से परीक्षा संबंधी कार्य/ड्यूटी कराए जाने की शिकायत भी सामने आई है। शिकायत में दावा किया गया है कि संबंधित ड्यूटी रजिस्टर में नाबालिग छात्राओं के नाम अंकित होने की जानकारी सामने आई है। इस मामले में शिक्षा विभाग द्वारा जांच किए जाने तथा जांच टीम के विद्यालय पहुंचने का उल्लेख शिकायत में किया गया है।
इन बिंदुओं पर जांच की मांग
• वर्ष 2024 में सुरेश खापर्डे को विद्यालय में आने अथवा कार्य/शिक्षण गतिविधि से जुड़ने की अनुमति किसके द्वारा दी गई।
• छात्राओं द्वारा मीना खापर्डे से शिकायत किए जाने के बाद क्या कार्रवाई की गई।
• वर्ष 2024 की घटना में तत्कालीन प्रधान पाठक अनुराग ओझा की क्या भूमिका थी।
• शिक्षा विभागीय जांच में अनुराग ओझा के संबंध में क्या तथ्य सामने आए।
• वर्ष 2026 में नाबालिग छात्राओं के नाम ड्यूटी रजिस्टर में किसके आदेश या निर्देश पर दर्ज किए गए।
• नाबालिग छात्राओं से किस प्रकार का कार्य कराया गया।
• इस पूरे मामले में विद्यालय के प्रधानाचार्य, शिक्षकों तथा संबंधित अधिकारियों की क्या भूमिका रही।
पुलिस एवं विधिक सेवा प्राधिकरण से कार्रवाई की मांग
शिकायत में थाना उरला से FIR क्रमांक 0131/2024 से संबंधित अभिलेख, शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट, संबंधित पत्राचार तथा वर्ष 2026 का ड्यूटी रजिस्टर सहित अन्य दस्तावेज प्राप्त कर जांच में शामिल करने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने कहा है कि जांच के दौरान यदि मीना खापर्डे, अनुराग ओझा अथवा किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध संज्ञेय अपराध के तथ्य पाए जाते हैं, तो लागू कानून के अनुसार आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाए।
साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रायपुर से उपलब्ध विधिक सहायता एवं आवश्यक कानूनी मार्गदर्शन प्रदान करने का अनुरोध किया गया है। नाबालिग छात्राओं की पहचान एवं गोपनीयता पूर्ण रूप से सुरक्षित रखने तथा उनके बयान एवं अन्य साक्ष्यों को नियमानुसार सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है।
अंतिम मांग
शिकायतकर्ता की मांग है कि पूरे मामले की तत्काल, निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच कर तथ्य सामने लाए जाएं तथा अपराध के तथ्य पाए जाने पर बिना अनावश्यक विलंब के कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही की गई कार्रवाई से शिकायतकर्ता को लिखित रूप में अवगत कराया जाए।



