मृत वसीयतदाता–मृत वसीयत प्राप्तकर्ता के पुत्रों के नाम चढ़ाई गई ज़मीन — तहसीलदार की शह पर राजस्व दालाली

रायपुर / अभनपुर: राजस्व विभाग में चल रहे संगठित भ्रष्टाचार और भूमि दालाली का एक और सनसनीखेज मामला ग्राम टेकाड़ी, पटवारी हल्का क्रमांक–3, उप तहसील खोरपा, अनुविभागीय अधिकारी अभनपुर के अंतर्गत सामने आया है। यह मामला न केवल नियमों की धज्जियाँ उड़ाता है, बल्कि यह भी उजागर करता है कि किस प्रकार मृत लोगों के नाम “काग़ज़ों में ज़िंदा” रखकर ज़मीन हड़पी जाती है।
यह पूरा मामला राजस्व प्रकरण क्रमांक
👉 202510116300040 / अ / 6 / वर्ष 2025–2026
से संबंधित है।

प्रकरण में खसरा नंबर 323/1 की भूमि, जो कि शारदा वर्मा एवं बोधिनी (पति – स्व. सरजू वर्मा) के संयुक्त नाम पर दर्ज थी, को लेकर बड़ा खेल किया गया।

📌 पूरा खेल कैसे हुआ:
• शारदा वर्मा की मृत्यु दिनांक 23/04/2021 को हो चुकी है।
• वसीयत प्राप्तकर्ता गुलाब वर्मा की भी मृत्यु वर्ष 2024 में हो चुकी है।
• दोनों की मृत्यु के प्रमाण-पत्र राजस्व रिकॉर्ड में संलग्न हैं।
इसके बावजूद, राजस्व विभाग में पहले जानबूझकर मृत व्यक्तियों के नाम कॉलम (फसल/खाता संबंधी प्रविष्टि) में दर्ज रखे गए, ताकि यह भ्रम बना रहे कि संबंधित खातेदार जीवित हैं।
इसी तकनीकी छल के आधार पर, उक्त राजस्व प्रकरण क्रमांक 202510116300040/अ/6/वर्ष 2025–26 में तहसीलदार द्वारा आदेश पारित कर भूमि को वसीयतदाता एवं वसीयत प्राप्तकर्ता के पुत्रों के नाम पर चढ़ा दिया गया।

❗ यह सीधा नियमों का उल्लंघन है
जब वसीयतदाता और वसीयत प्राप्तकर्ता दोनों मृत हों, तब:
• वसीयत स्वतः अमान्य (Void) हो जाती है।
• ऐसी स्थिति में उत्तराधिकार कानून लागू होता है, न कि मनमाना नामांतरण।
इसके बावजूद तहसीलदार ने:
✔ मृत्यु प्रमाण संलग्न होते हुए भी
✔ कानूनी परीक्षण किए बिना
✔ सुनियोजित तरीके से
नामांतरण आदेश पारित किया।
🚨 अवैध कर्मचारियों के माध्यम से राजस्व कार्य — गंभीर अनियमितता
इस पूरे प्रकरण में एक और अत्यंत गंभीर तथ्य सामने आया है कि तहसील कार्यालय में तहसीलदार की जानकारी व संरक्षण में अवैध एवं बाहरी व्यक्तियों से राजस्व कार्य कराया जा रहा है।
ये व्यक्ति:
• सरकारी कर्मचारी नहीं हैं,
• न ही उनकी कोई वैधानिक नियुक्ति है,
• इसके बावजूद वे फाइल तैयार करने, प्रविष्टि कराने, नामांतरण और आदेशों की प्रक्रिया में प्रत्यक्ष रूप से संलिप्त पाए जा रहे हैं।
यह स्थिति न केवल राजस्व नियमावली का घोर उल्लंघन है, बल्कि यह दर्शाती है कि तहसील कार्यालय को निजी दफ्तर की तरह चलाया जा रहा है, जहाँ अवैध कर्मचारी दलाली और भूमि हड़पने के कार्य में सक्रिय हैं।
💰 बड़ी राजस्व दालाली की आशंका
इस अवैध नामांतरण के बाद भूमि का आगे क्रय–विक्रय किया गया, जिससे करोड़ों रुपये के घोटाले की आशंका जताई जा रही है। यह पूरा प्रकरण बिना तहसीलदार, अवैध कर्मचारियों एवं राजस्व नेटवर्क की मिलीभगत के संभव नहीं है।
❓ सीधे सवाल:
• तहसील कार्यालय में अवैध कर्मचारियों को किसके आदेश से बैठाया गया?
• क्या इन बाहरी व्यक्तियों के माध्यम से अन्य भूमि मामलों में भी नामांतरण कराए गए?
• जब मृत्यु प्रमाण संलग्न थे, तब तहसीलदार ने नामांतरण क्यों किया?
• कितनी ऐसी ज़मीनें इसी तरीके से “जमींदार तहसीलदार” के संरक्षण में हड़पी गईं?
⚠️ जिम्मेदारी तय
इस पूरे मामले में तहसीलदार की भूमिका संदिग्ध नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष रूप से दोषपूर्ण है।
यह मामला प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि
👉 अवैध कर्मचारियों के जरिए संचालित सुनियोजित राजस्व अपराध का स्पष्ट उदाहरण है।
📢 मांग:
1. राजस्व प्रकरण क्रमांक 202510116300040/अ/6/वर्ष 2025–26 में पारित नामांतरण आदेश को तत्काल निरस्त किया जाए।
2. तहसील कार्यालय में कार्यरत सभी अवैध/बाहरी कर्मचारियों को तत्काल हटाया जाए।
3. पूरे प्रकरण की EOW / ACB से जांच कराई जाए।
4. संबंधित तहसीलदार, अवैध कर्मचारियों एवं लाभार्थियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए।
5. अवैध रूप से किए गए सभी भूमि लेन–देन को शून्य घोषित किया जाए।
यह मामला केवल एक परिवार या एक ज़मीन का नहीं है, बल्कि यह उजागर करता है कि कैसे राजस्व विभाग में बैठे कुछ “जमींदार अफसर” अवैध लोगों के सहारे आम जनता की ज़मीन को माल बना रहे हैं।
📎 संबंधित वसीयतनामा, मृत्यु प्रमाण पत्र, तहसीलदार द्वारा पारित आदेश एवं राजस्व प्रकरण क्रमांक सहित प्रतियाँ संलग्न।



