एनआईटी रायपुर में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता पर तीन दिनों का सेमिनार का आयोजन किया

संपादक ,पंकज दास,

एनआईटी रायपुर में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता पर तीन दिनों का सेमिनार का आयोजन किया

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर में 20 जुलाई 2024 से 23 जुलाई 2024 तक मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम संस्थान के सभी एन आई टी परिवार के शिक्षकों, पीएचडी विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों, हॉस्टल वार्डन, स्टाफ सदस्यों, सुरक्षा गार्ड और वर्कर्स के लिए आयोजित किया गया। सत्र की वक्ता संस्थान की काउंसलर डॉ. हिना चावड़ा रहीं। सत्र तीन दिनों के लिए आयोजित किया गया जिसमें 20 और 22 जुलाई को यह सत्र संस्थान के सुरक्षा गार्डों , सफाई कर्मचारियों और हॉर्टिकल्चर कर्मचारियों के लिए आयोजित किया गया | लगभग 200 कर्मचारियों की उपस्थिति रही.अंतिम दिन का सत्र 23 जुलाई को आयोजित किया गया जिसमें संस्थान के कर्मचारी, स्टाफ सदस्य, विद्यार्थीयों के साथ-साथ रायपुर शहर के सीनियर सिटिजन वेलफेयर फोरम के वरिष्ठ नागरिक मौजुद रहे।

कार्यक्रम के अंतिम दिन 23 जुलाई 2024 के अंतिम जागरुकता सत्र के मुख्य अतिथि संस्थान के निदेशक डॉ एन.वी. रमना राव रहे। मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. समीर बाजपेयी, मैकेनिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर डॉ. एस. सान्याल, भी इस दौरान मौजुद रहे।

डॉ. एन.वी. रमना राव ने मेंटल वेलबीइंग के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि अच्छा मानसिक स्वास्थ्य हर किसी को खुश करता है | उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विभिन्न उच्च संस्थानों के विद्यार्थी मानसिक समस्याओं से जूझ रहे है इसलिए इस क्षेत्र में निरंतर कार्य करने की आवश्यकता है | उनहोंने कहा कि अच्छा मानसिक स्वास्थ मानसिक चुनौतियों से निपटने में मदद करता है, और साथियों और परिवार के साथ अच्छे संबंध बनाने में मदद करता है। डॉ सान्याल ने सत्र के सफल आयोजन के लिए डॉ हिना चावड़ा के प्रयासों की सराहना की |

सत्र की मुख्य वक्ता डॉ. हिना चावड़ा ने सभी उपस्थित लोगों का स्वागत किया। डॉ. हिना चावड़ा ने कहा कि हमने मिट्टी पत्थर पेड़ पौधे जीव जानवरों के नियमों को समझा पर क्या हमने मनुष्य के नियमों को समझा उनके सुखी दुःखी होने के नियमों समझा, नहीं समझा इसलिए मनुष्य के जीवन मे मानसिक समस्याएं नजर आती हैं. सुख दुख दोनों ही समाज, परिवार और अपनों से मिलते हैं तो उनमें आपस में सामंजस्य बिठाने के लिए हमें स्वयं एवं सामने वाले को समझना होगा. स्वयं को कैसे जाने इस पर गहरी चर्चा हुई. रिश्तों मे धैर्य रखने के लिए हमे स्वयं में और एक दूसरे में विश्वास रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति स्वयं में विश्वास करता है, दूसरे की श्रेष्ठता में सम्मान करता है, और व्यवहार में सामाजिक रहता है। स्वावलम्बन के प्रति विश्वास. एवं कुछ सूत्रों पर चर्चा हुई जो हैं “रिश्तों को सहना नहीं हैं समझना हैं,” “यदि गलती हैं तो समझ नहीं यदि समझ हैं तो गलती नहीं ” इत्यादि

इस कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह 20 जुलाई 2024 के मुख्य अतिथि मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग के प्रमुख डॉ. समीर बाजपेयी रहें। उन्होंने बताया कि हम उन चीजों के बारे में चिंता करते हैं जो हमारे नियंत्रण से बाहर हैं। उन्होंने कहा कि यह हमारे मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, उन्होंने कहा कि कभी-कभी हम रोजमर्रा की जिंदगी में इतने तल्लीन हो जाते हैं कि हम अपने लिए समय निकालना भूल जाते हैं।

डॉ. हिना चावड़ा ने अतिरिक्त समय निकालने और कार्यशाला में भाग लेने के लिए सुरक्षा गार्डों की सराहना करते हुए सत्र की शुरुआत की। उन्होंने सवाल जवाब से सत्र की शुरुआत करते हुए पूछा कि वे पूरे दिन अपना समय कैसे बिताते हैं और हर दिन उनका एजेंडा क्या है। उन्होंने यह सवाल भी पूछा कि खुश रहने के लिए कितने पैसे की जरूरत है और जिसके उन्हें विभिन्न उत्तर मिले। एक उत्तर जो उसे मिला वह यह था कि ‘संतोष ही असली खुशी है’। उन्होंने विस्तार से बताया कि भौतिक सुख कैसे क्षणिक होता है और जीवन में व्यक्ति का लक्ष्य स्थायी सुख प्राप्त करना होना एवं सुविधा के साथ सुखी होने के लिए सही समझ होना भी आवश्यक हैं. एवं उन्होंने बताया की तन के लिए धन चाहिए और मन की ख़ुशी के लिए सही समझ बढ़ाना होगा उसी समझ के लिए यह सेमिनार का आयोजित किया गया हैं.

कार्यक्रम के अंत में फीडबैक सत्र का आयोजन किया गया जिसमें प्रतिभागियों ने इस तरह के सत्र मे और आना चाहेंगे इस पर अपने विचार रखे और इसका समापन डॉ समीर बाजपेयी के धन्यवाद प्रस्ताव और एक समूह फोटोग्राफ के साथ हुआ।

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