सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, SC/ST में कोटा के अंदर कोटा को दी परमिशन

संपादक, पंकज दास,

Supreme Decision : सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए एससी/एसटी में कोटा के अंदर कोटा को अपनी मंजूरी दे दी है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि कोटा में कोटा असमानता के खिलाफ नहीं है। सात जजों की पीठ ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि राज्य सरकार एससी/एसटी में सब कैटेगरी बना सकती है, जिससे जरूरतमंत कैटेगरी के लोगों को आरक्षण का अधिक लाभ मिलेगा।

दरअसल, पंजाब में वाल्मीकि और मजहबी सिख जातियों को अनुसूचित जाति जाति आरक्षण का पचास फीसद हिस्सा देने वाले कानून को साल 2010 में हाई कोर्ट ने निरस्त कर दिया था। हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। गुरुवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया।

फैसले में शामिल रहे CJI

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने 20 साल पुराने 5 जजों के फैसले को पलट दिया. कोर्ट ने संकेत दिया कि एससी और एसटी के आरक्षण के लिए एक सब-कैटेगरी बनाई जा सकती है. सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले में सीजेआई चंद्रचूड़ सहित 7 जज शामिल थे. इस फैसले में 6 जजों ने पक्ष में जबकि एक जज ने विपक्ष में वोट किया यानी कि यह फैसला 6/1 से पास हुआ. जस्टिस बेला त्रिवेदी इस फैसले से असहमत रहीं.

2004 सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था

एससी/एसटी के आरक्षण के आरक्षण के संबंध में 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था. इसमें 5 जजों के पीठ शामिल थी. 2004 के फैसले में कोर्ट ने कहा था कि अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को आरक्षण देने के लिए उन्हें उप-श्रेणियों में विभाजित करने का कोई अधिकार नहीं है. ऐसा करना समानता के अधिकार का उल्लंधन होगा. हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ के इस फैसले का मतलब यह होगा कि राज्य सरकारों को अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के बीच उप-श्रेणियां बनाने का अधिकार होगा.

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