कबाड़ियों का पत्रकारों पर हमला, सूरजपुर के बाद अब राजधानी भी सुरक्षित नहीं।
लोगों की सुरक्षा करने वाली पुलिस के परिवार ही अगर सुरक्षित नहीं तो जनता की क्या सुरक्षा हो सकती है

अधिवक्ता के टीम भी समर्थन में उतरी

वरिष्ठ अधिवक्ता भगवानों नायक जी ने हर संभव कानूनी मदद करने का आश्वासन दिया
क्या है पूरा मामला:
मामला यह है कि टाटीबंध से विलासपुर जाने वाले बायपास रोड पर HP पेट्रोल पंप से लगा हुआ एक यार्ड है जहां लोहा काटकर बेचने की सूचना कुछ पत्रकारों पर मिली जिसकी छानबीन करने कुछ पत्रकार उस यार्ड पर पहुंचे। पत्रकारों ने उनसे बात करनी चाही लेकिन उनके द्वारा दरवाजा नहीं खोला गया और पत्रकारों द्वारा मौके पर ही वीडियो बनाया गया जहां एक वर्कर गैस कटर से लोहा काट रहा था। इस यार्ड में करीब 20 से 25 वर्कर मौजूद थे, जिसका वीडियो भी ट्रक पर चढ़कर लोहा काटते हुए बनाया गया। इसके बाद यार्ड का ही एक मालिक बाहर आया और अभद्र गालीगलौच कर डंडे से पत्रकारों पर वार कर दिया, जहां एक महिला पत्रकार बेहोश होकर गिर पड़ी फिर भी उस यार्ड मालिक द्वारा लगातार डंडे से सभी पत्रकारों को मारना शुरू कर दिया। पत्रकारों ने कहा भी कि हमको सूचना मिली है आप बात करिए झगड़े लड़ाई की कोई बात ही नही है लेकिन उस यार्ड मालिक द्वारा पत्रकारों की कोई बात नही सुनी गई और लगातार लकड़ी के मोटे दंडों से सभी पत्रकारों पर वार किया गया और महिला पत्रकार का मोबाइल भी यार्ड मालिक द्वारा छीन कर रख लिया गया और यह धमकी भी दी गई कि दुबारा यहां आए तो जान से मारकर यही गाड़ दिया जायेगा।
वही इस मामले की सूचना कबीर नगर थाने में दी गई तो उनके द्वारा यह मामला आमनाका थाना क्षेत्र अंतर्गत बताया गया और जब आमानाका थाने गए तो वहां 2 साथियों को मुलायजा के लिए एम्स हॉस्पिटल भेजा गया फिर उनके द्वारा बताया गया कि यह मामला उरला थाना क्षेत्र अंतर्गत आता है। जब पत्रकार और उनके साथियों ने उरला थाना प्रभारी को इसकी सूचना देते हुए आवेदन लिख कर दिया गया तो उनके कोई सुनवाई नही की गई उल्टे थाना प्रभारी द्वारा मामले का सेटलमेंट करो नहीं तो तुम्हारी जान भी जा सकती है कहकर पत्रकारों का आवेदन स्वीकार थाना प्रभारी द्वारा नही लिया गया और यह भी कहा कि आवेदन से पत्रकार शब्द को हटाओ। जिससे साफ साफ जाहिर होता है कि कहीं ना कहीं पुलिस प्रशासन की मिलीभगत भी इस मामले से जुड़ी हुई है।
महिला पत्रकार का मोबाइल थाने में आकर यार्ड के ड्राइवर द्वारा दिया गया, लेकिन ड्राइवर से भी कोई पूछताछ थाने में नहीं की गई और उसे मोबाइल लेने के बाद वापस भेजा:
बता दें कि महिला पत्रकार जिसका मोबाइल छीना गया था उसे वापस करने जब यार्ड का ड्राइवर थाने पहुंचा तो उसे भी मोबाइल लेकर थाने से वापस भेज दिया गया और कोई भी पूछताछ यार्ड ड्राइवर से थाने में नही की गई।
इस बात से यह भी स्पष्ट जाहिर है कि पुलिस प्रशासन की भूमिका भी संदिग्ध है, और उनके भी संरक्षण में यह कार्य धड़ल्ले से किया जा रहा है। उरला थाना में सुनवाई नही होने के बाद अब सभी पत्रकार रायपुर SP से मामले की शिकायत भी की गई बताया जा रहा



